बेटी

क्यों कहते है कि बेटी को मानते है बेटा ,

बल्कि वक्त आने पर बेटी सा बलिदान कोई न देता।

बेटे को हर हाल में ऊँचाई दिलानी है ,

अरे बेटी क्या,उसने तो रोटी बनानी है ।

बेटा कैसा भी हो, आँख का तारा है ,

बेटी कहने को तो पूरा घरबार तुम्हारा है ।

बेटे को बना दिये हो सबका प्यारा ,

बेटी और क्या रहे, सिवाय टूटता तारा ।


Black: The Colour

Black is the colour of Fertility , 

Proginator of brightness,


Black is the colour of hope ,

Waiting for the morning ,


Black is the colour of purity ,

Helping to forget the past ,


Black is the colour of truth ,

That everyone has to face in life , 


Black is the colour of life ,

Giving a way to live ...

कर्ज़ चुकाना पड़ता है ...

कर्ज़ चुकाना पड़ता है,

यह बात तो सच है ।

कोई मामूली चीज़ देकर लोग ,

किश्तों में कर्ज ले लेते है ।

जताते है , के वो मेहरबान है ,

सच तो ये है 

की हमारी साँसों का भी , ये हिसाब रखते है ।

किसी पर एतबार न करो यहा ,

रिश्तें भी खून के आंसू रुलाते है ।

ये जो इतना अपनापन दिखाते है ,

समय आने पर अपनी हैसियत दिखा ही देते है ।

कोई यह किसीका का नही ,

बस एक यही सच बात है ।

ये सब मतलब का बाजार है ,

जो हमारे सपने तक बेच देते है ।


ये जीवन कुछ कर्ज सा है ...

 ये जीवन कुछ कर्ज सा है ...


 ये जीवन कुछ कर्ज सा है,

हम जीते है चुकाने के लिए।

हम यूँही सोचते जाते है,

हम यूँही देखते जाते है।

ये अजीब दास्ताँ है जिंदगी,

ये अजीब हादसा है जिंदगी।

यू तो है तुम्हारी मगर,

है ये तुम्हारी नहीं ...

और क्या कहे इस दुनिया का ...

 और क्या कहे इस दुनिया का ...


और क्या कहे इस दुनिया का,

इसका तो कोई जवाब नही ।

जो काम के हो तो याद करे,

वरना तुम कोई कमाल नही ।

और क्या कहे इन लोगों का,

ये फ़ायदे से हि आते है ।

फ़ायदे से ही सवारे तुम्हे,

फ़ायदे से ही जलाते है ।

जब हो तुम्हारे दिन अच्छे,

तो तुम्हे ये पूजते है,

और ना हो अगर पास कुछ भी,

तब भी कहा छोडते है।

तुम हो अच्छे, तुम हो बुरे,

ये तुम्हे नोंच ही खाते है।

यह इनकी बनाई नगरी है,

ये कहाँ किसी को छूट देते है।

तुम जिंदा हो ऐसे किचड मे,

जहाँ कमल नही खिल सकते है।

ये किचड तो वो किचड है,

जहाँ अपने ही नही मिलते साहब।

ये डराते धमकाते है, 

अपनी बनाई व्यवस्था मे रहना सिखाते है ।

ये नोचते खा जाते है,

ये तुम्हे जिन्दा कहाँ छोडते है ।

तुम तो बस एक हाड-मांस का पुतला हो,

जो बना ही इनके लिये है शायद ।

ये जिंदगी वैसे तो तुम्हारी है,

पर सुच बताना, क्या तुम खुद के मालिक हो ।

ये दुनिया बेहद अजीब है,

जो हाल तो जानती है पर फिर भी तमाशा देखती है।

ये लोग बडे बेगाने से है,

अपना कहकर तुम्हे बिच रास्ते छोड देते है ।

इनको बस अपनी बनाई व्यवस्था की पडी है,

जो तो कई बरसों से सड़ी पडी है।

ये सब जो है, सब स्वार्थी है,

ना जाने क्यों अपना होने का ढ़ोंग करते है।

तुम कैसे सोच सकते हो,

तुम्हारी मर्जी के बारे मे,

ऐसी जगह पर साहब, 

जहाँ ना तुम्हारा आना तुम्हारे हाथ मे है,

ना यहाँ से जाना ।

ज़िंदगी ?

 ज़िंदगी ?

के अब बस कोई सजा न दो ,
जीने के और कोई वज़ह न दो।  
के अब हमे और कुछ देखना नहीं है ,
जीने के नाम मरना नहीं है। 

यूँ तो जीने पर बेहद हसीं नग़में बने है ,
पर सच पूछती हु , क्या वो थोड़े भी अपने लिए है ?
जीने के बारे में जो सपनें ख़िले देखे थे ,
सच में तो बस हमे सदमे मिले है।  

यूँ तो कभी शिकवा किया नही तुझसे , ऐ ज़िंदगी ,
पर क्या तू हमारी शिकायत की राह देखती रही ?
यूँ तो हारने वालों में हम भी नहीं है ,
पर क्यों तू इम्तेहान लेती रही। 

जो इतने बुरे लगते है हम ,
तो सुनो , दुनियाँ देखने का शौक़ हमे था भी नही।  
जो इतना तड़पाना चाहती थी ,
तो तेरे मोहताज हम कभी थे भी नही। 

अजिंठा . . .

  अजिंठा . . .  अजिंठा, तसाच हतबल, अबोल, तितकाच कठोर दिसणारा पण मनाने तितकाच मृदु, तितकाच देखणा, तितकाच अनुभवी, तितकाच पूर्ण व तितकाच अतृप्त...