क्यों कहते है कि बेटी को मानते है बेटा ,
बल्कि वक्त आने पर बेटी सा बलिदान कोई न देता।
बेटे को हर हाल में ऊँचाई दिलानी है ,
अरे बेटी क्या,उसने तो रोटी बनानी है ।
बेटा कैसा भी हो, आँख का तारा है ,
बेटी कहने को तो पूरा घरबार तुम्हारा है ।
बेटे को बना दिये हो सबका प्यारा ,
बेटी और क्या रहे, सिवाय टूटता तारा ।
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