बारिश ...

 बारिश ...

बारिश रिझाती हैं मन को,
बारिश रिझाती हैं सब को।

यूँ तो बूंदों का कोई रंग नहीं होता,
फिर भी जीवन में रंग भरने के लिए ये अच्छा बहाना बन जाती हैं।

बंजर सिर्फ धरती नहीं होती,
मन भी कभी कभार बंजर बन जाते हैं।
जरूरत सिर्फ धरती को ही नहीं होती इसकी,
इंसान को भी बारिश जीना सिखाती हैं।

जैसे रेगिस्तान में ये फूल खिलाती हैं,
मन के माटी में भी आस के फूल खिलाती हैं।

ये सिखाती हैं हमे हँसना और रोना,
ये सिखाती है कितना हसीन है किसी चीज़ को निर्माण करना।

रेगिस्तान की प्यास बुझाती हैं बारिश,
मन मे विश्वास लाती हैं बारिश

जैसे धरती सुगंधित हो जाती हैं,
इंसान के जीवन में भी सुगंध भरती हैं बारिश!

जैसे शाद्वल सामने दिखाई दे,
वैसे ही सपने दिखाती हैं बारिश

जागे रहते सपने दिखाएं, वो होती हैं बारिश,
और उनको पूरा करने का ध्यास जगाएं, वो होती हैं बारिश।

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