मेरी माटी ...

मेरी माटी ... 


सबको अपना मान कर प्यार करे, ये है मेरी माटी। 
सबका ये उद्धार करे, ये है मेरी माटी। 
जीवन को जो सार दे, ये है मेरी माटी। 
पूरे जग को एकही संसार माने, ये है मेरी माटी। 

यह माटी है, जहाँ कभी सबसे पुरातन संस्कृती की नींव बोई गयी। 
जहाँ कई वीरों की कुर्बानी देखी गयी। 
यह माटी है, हड़प्पा, मोहेंजोदड़ो की। 
छत्रपती शिवाजी महाराज, राणा प्रतापसिंग जी की। 

यह माटी है, जहाँ सूरज कुछ ज्यादा ही गर्व से उगता है। 
जहाँ लोगों ने चन्द्रमा से शितलता का गुण पाया है। 

यह माटी है,
संस्कारों की। 
अध्यात्म की। 
वेदों की। 
संतवाणियों की। 

यह माटी है, संत तुकाराम, संत ज्ञानेश्वर, संत बसवेश्वर आदि की। 
यह माटी है, संत मीराबाई, संत मुक्ताबाई, संत जनाई आदि की। 

धन्य हुई हूँ, के मैं ऐसे माटी का बीज हूँ। 
धन्य हुई हूँ, के मैं ऐसे आँगन का पेड़ हूँ। 

जब भी सोचू इस धरती माँ के बारे मे ,
मेरा शीश नतमस्तक हो जाता है। 
जब भी देखू इस धरती माँ को,
मेरा दिल भर आता है।  

ये मेरी माटी है, जो सबका स्वागत करती है। 
ये मेरी माटी है, ज सबका सम्मान करती है। 

यह माटी है, 
एकात्मभाव की। 
समरसताभाव की। 
शिव की। 
शक्ति की। 
प्रेम की।  
कर्तव्य की। 
विश्वास की। 
परंपरा की। 

यह माटी कही और की नही है ,
यह माटी है भारत माँ की।  

                                                                                                             
                                                                                                                - पूजा निचोले 

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