हालात के पिंजरे बंधा पंछी है इंसान ...

हालात के पिंजरे बंधा पंछी है इंसान ... 

हालात के पिंजरे बंधा पंछी है इंसान ,
चाहे कितनी भी कोशिश क्यों न करे ,
ये आजाद हो नही सकता।

तमाम तमन्नाऐ लेकर यह निंदा तो रह लेता है ,
पर निराशाएँ कब्र बनकर उसे रिहा नहीं करती।

ऐसे डूबते सूरज की तरह है इंसान ,
जो अपना उदय भी बता नही सकता।

रहती है कश्मकश हर पल इस पुतले में ,
पर ना जाने क्या मजबूरी होती है ,
की जता भी नही सकता।

जब समझ जाता है जिने का अर्थ ,
ये अंत की तरफ आ चूका होता है।

जब आ जाता है इसे बिनदिक्कत चलना ,
ये आखिरी ठोकर खाता है।

हे खेल रचनेवाले,
हमे कठपुतलियाँ मत समझो ,
इन आँखों में जो आँसू हैं ,
तुम पानी की चंद बूंदे मत समझो।

जो भेजा है यहाँ पर यूँ बेसहारा ,
क्यों होता हैं फिर हम पर दुखों का पहारा।
हम यूँही अकेले तन्हा बस अंजान राह पर चलते रहे ,
अपनी तमाम ख्वाबों का हम गला घोटते चलते रहे।

जो सोचते थे के यह  होगा ,
हम वही गलत होते चले गए  ,
जो न सोचे सपनों में भी ,
हम वही देखते चले गये।
कहने को तो मौत पर कफ़न ओढ़ते है ,
हम तो ताउम्र वही पहनते चले गए ।

ना जाने ए ज़िंदगी ,
तूने भीड़ हैं जग मे कितनी देखी ,
पर हम तो भरे बाजार में ,
बस तन्हा होते चले गए। 

1 comment:

  1. Man Ko Choo liya Pooja Madam....very very very nice..

    ReplyDelete

अजिंठा . . .

  अजिंठा . . .  अजिंठा, तसाच हतबल, अबोल, तितकाच कठोर दिसणारा पण मनाने तितकाच मृदु, तितकाच देखणा, तितकाच अनुभवी, तितकाच पूर्ण व तितकाच अतृप्त...