कॉलेज की यादें ...
आज कॉलेज की तरफ काम से जाना हुआ ,
और अपने कॉलेज के दिनों की याद आ गई ।
ऑफिस की तरफ मुड़ने से पहले जब सामने वाली कैंटीन में बैठे जोश को देखा ,
तो भूली बिसरी यादों ने होश गवाँ दिए।
ऐसे ही खुद के धुंद में रहते थे हम सब ,
ऐसे ही अपने मगन में जीते थे हम सब।
वो हर मौसम की चाय ,
वो दोस्तों के तरह हमेशा साथ निभाने वाले बिस्कुट।
वो मस्ती, वो बदमाशी ,
वो एक दूसरे को उतना ही तंग करना ,
पर समय आने पर बिन बताये ही जान देना ,
वो लेक्चर्स के बाद की थकावट भगाने वाली चाय ,
वो लेक्चर बंक करने पर भी पी जाने वाली चाय ,
वो लाइब्रेरी में पढाई के बीच ली जाने वाली चाय ,
वो एग्जाम के बाद की सुकुन भरी चाय ,
वो अच्छे मार्क्स मिलने पर ली जाने वाली चाय ,
वो बुरे वक्त में दोस्तों का हौसला बढ़ाने वाली चाय।
आज भी वो कैंटीन वैसी की वैसी है ,
और वो चाय भी वैसी ही बनती है ,
पर पता नहीं, जो स्वाद उन दिनों में इसमे हुआ करता था ,
आज मानो गायब हुआ सा लगता है।
वैसे यहाँ कुछ बदला नही है ,
पर जो बदले है वो दिन है, हम है और हमारी उम्र शायद।
क्योंकि आज भी वहाँ कोई खुल के हँस रहा था ,
जहाँ एक वक्त हम भी खुलकर हँसा करते थे।
क्योंकि वहाँ आज भी कोई खुलकर जी रहा था ,
जहाँ एक वक्त हम भी खुलकर जिया करते थे ...