ये बारिश की बुंदे,
ये माटी की खुशबू,
यूँ ख्वाब दिखाते है कोई,,
ये ठंडी हवाएँ ,
ये महकी फिजाएँ,
यूँ राह दिखाते है कोई,
बस यही तो है,
जो सतरंगी बनकर छाते है|
रोजमर्रा घुटी सी जिंदगी को,
जो साँस लेना सिखाते है|
बस यही तो है,
जो हम रिझाते है|
जो भी हो मैल दिल मे,
ये साफ कर जाते है|
ये वो है,
जो बताते है,
के मानो कितनी भी धूप क्यो न न हो जिंदगी मे,
एक दिन आकर बारिश सब ठीक कर देगी|
और हाँ,
शायद तरसाए बहुत ये,
पर एक ना एक दिन जरूर बरसेगी,
मानो रूठी किस्मत हो चमके जैसे ...
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