जिंदगी की राह ...

पता नही कहाँ जा रहे है,

बस हम तो यूँ ही जिंदगी मे आगे चलते  जा रहे है। 

पता नही की, मंजिल और कहाँ है,

या जहाँ हम है वही मंज़िल है। 

माना के देख नही सकते के आगे क्या होगा,

पर यह भी तो तय नही कर पा रहे है,

के कब तक चलते जाना है।  

शायद इसी को जिंदगी कहते है,

जिसमे कोई एक ठिकाना ना हो,

मुकाम तो एक है कही  ,

पर मानो रास्ते बहुत हो। 

और इन रास्तों के बीच जिंदगी हमे ले जा रही है,

अपना तजुर्बा मानो खुद देती जा रही है। 

बड़ा ही दिलचस्प तरीका है जिंदगी का,

खुद के बारे मे सिखाने का। 

बड़ा ही अजीब सलीका है जिंदगी का,

खुद को दिखाने का। 

पर कुछ भी कहिये,

जितना जिंदगी सिखाती है,

किसी भी दक्षिणा की अपेक्षा न रखते हुए,

यकिन मानिये,

कोई क्या ही सिखा पाएगा। 

जितना सच्चा अनुभव यह देती है,

चाहे कैसा भी क्यों ना हो,

कोई क्या ही दे पायेगा। 


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