पल भर में जाता है वो पल,
जिस पल के बारे में सोचते है हर पल,
फिर भी पल भर में याद आता है वही पल,
के हर पल क्यों नहीं आता है वही पल ...
अजिंठा . . . अजिंठा, तसाच हतबल, अबोल, तितकाच कठोर दिसणारा पण मनाने तितकाच मृदु, तितकाच देखणा, तितकाच अनुभवी, तितकाच पूर्ण व तितकाच अतृप्त...
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