कर्ज़ चुकाना पड़ता है ,
यह बात तो सच है ।
कोई मामूली चीज़ देकर लोग ,
किश्तों में कर्ज ले लेते है ।
जताते है , के वो मेहरबान है ,
सच तो ये है
की हमारी साँसों का भी , ये हिसाब रखते है ।
किसी पर एतबार न करो यहा ,
रिश्तें भी खून के आंसू रुलाते है ।
ये जो इतना अपनापन दिखाते है ,
समय आने पर अपनी हैसियत दिखा ही देते है ।
कोई यह किसीका का नही ,
बस एक यही सच बात है ।
ये सब मतलब का बाजार है ,
जो हमारे सपने तक बेच देते है ।
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