यहाँ सब बिकता है।


यहाँ सब बिकता है। 


शिक्षा के कागजों से लेकर नौकरी तक ,
यहाँ सब बिकता है।
दिखावें की दोस्ती से लेकर शादी के लिए लड़की तक,
यहाँ सब बिकता है।
सपनों से लेकर सच्चाई तक ,
यहाँ सब बिकता है।
नियमों से लेकर कानून तक ,
यहाँ सब बिकता है।

यहाँ तक तो क्या ,
रिश्तें भी बिकते है ।
अपने भी पराये हो जाते है।
अगर मनचाही बात ना हो ना साहब ,
तो सबसे पहले यही हमे मात दे जाते है।
अरे दुश्मनों की क्या जरुरत ,
जब अपने ही धोखा दे जाते है।

क्या इस मोहमाया मे अच्छाई की कोई राह नही है ,
क्या इस झूठ के समंदर मे सच्चाई की कोई नांव नही है।
क्या इस स्वार्थ से लथपथ दुनियाँ मे अपनों का कोई आँगन नही है।
क्या इन पत्थरदिलों मे कोई इंसान खरा सोना नही है।

नही साहब ,
ये बस ऐसी एक दुनियाँ है ,
जहाँ सब बिकता है।
ये जो सब चीजें है, बस एक दिखावा है ,
क्योकि हम वहाँ रहते है ,
जहाँ सब बिकता है। 

No comments:

Post a Comment

अजिंठा . . .

  अजिंठा . . .  अजिंठा, तसाच हतबल, अबोल, तितकाच कठोर दिसणारा पण मनाने तितकाच मृदु, तितकाच देखणा, तितकाच अनुभवी, तितकाच पूर्ण व तितकाच अतृप्त...