संगत ...

संगत ...

इंसान की संगत बड़े ही मायने रखने वाली चीज है। एक इंसान चाहे तो आबाद कर सकता है, और चाहे तो बर्बाद भी कर सकता है।  इसीलिए, किसी के भी साथ रहने से पहले उसे अच्छे से समझना यहाँ कारीगर साबित होता होता है। इंसान अगर समजझदार और जिम्मेदार हो, तो चाहे आपके आसपास रेगिस्तान भी क्यों ना हो, आपको उसमे शाद्वल का अनुभव हो सकता है। वही अगर साथ देने वाला ही आग लगाए, तो सावन भी यहाँ कुछ काम नही कर सकता है। 
वैसे तो सभी अकेले रह सकते है या रह लेते है। पर फिर भी ये जो कहाँ जाता है की किसी के होने का महत्त्व कुछ अलग ही ऊंचाई हमे दिलाता है, यह बात कोई यूँही नहीं है। यह आपके परिवार, मित्रगण इनमें से कोई भी हो सकता है।अब सवाल यह उठता है की, ऐसे लोगों की जरुरत क्यों होती है ? तो इसका भी जवाब यही है की, रास्ता तो सभी को काटना होता है, पर फिर भी जब रास्ते में कोई हमारा आत्मविश्वास कायम रखने में हमारी मदद करे, हमे अपने सही- गलत चिजों के साथ  अपनाए, हमे भटकने से रोके, हमे दुनिया का मतलब समझाए और सबसे महत्वपूर्ण बात की हमे हमसे मिलाए, तो बात कुछ अलग होती है। इंसान का खुदसे मिलना यहाँ मायने रखता है। और अचरज की बात यह है की खुदसे मिलने के लिए दुनिया की जरूरत, हो ना हो, होती ही है। यह एक निरंतर प्रक्रिया है, जो जीवन भर के लिए चलती है और फिर यहाँ हमे लगते है लोग, जो हम पर हम से ज्यादा विश्वास रखते है। उम्मीद तो खैर सब रख लेते है पर उतना ही विश्वास शायर बहुत कम लोग रखते है। कहते है 'उम्मीद पर दुनिया कायम है', पर मेरी मानो तो, उम्मीद से ज्यादा विश्वास पर दुनिया कायम रहती है। ऐसा नही की, लोग मिलते नही सहकार्य नही करते, पर सच्चे मन से जो आपको दुनियादारी मे साथ दे वैसे लोग शायद कम ही होते है, तो यह आपका कर्तव्य है की, ऐसे लोगों को जो दुनिया के सागर मे मोती की तरह होते है, उन्हें आप संभाले क्योंकी, मोती ऐसे ही नही बनते है ना ही मिलते है। ऐसे लोग पहले तो बहुत कम होते है फिर जो मिले तो अपने पास हर हालात मे साथ रखना चुनौती का कार्य है। पर जीवन की परीक्षा इसी मे है। इसलिए जो भी अच्छा है, उसे अपने पास मे संभाल कर रखना हमारा कर्तव्य है और यह बात हम जितने जल्दी समझ सके उतनी ही हमारी भलाई है। संगत पर संतों ने, बड़े- बुजुर्गों ने यूँ ही अपनी राय नही दी है। इंसान की व्यक्तित्व पर संगत का बड़ा ही असर होता है, इसलिए तो कहा जा सकता है की, 'संगत बढ़िया तो सब बढ़िया' ... 

घुटन ...

 हर एक चिज से इसलिए भाग रहे है ,

क्योंकि गर रुके तो शायद सांस नही ले पाएंगे ...

नुकसान ...

बात शायद कड़वी हो ,

पर सौ टका खरी है ,

नुकसान कभी भी एक तरफ से नही होता ... 

कॉलेज की यादें ...

कॉलेज की यादें ... 


आज कॉलेज की तरफ काम से जाना हुआ ,

और अपने कॉलेज के दिनों की याद आ गई ।  

ऑफिस की तरफ मुड़ने से पहले जब सामने वाली कैंटीन में बैठे जोश को देखा ,

तो भूली बिसरी यादों ने होश गवाँ दिए। 

ऐसे ही खुद के धुंद में रहते थे हम सब ,

ऐसे ही अपने मगन में जीते थे हम सब। 

वो हर मौसम की चाय ,

वो दोस्तों के तरह हमेशा साथ निभाने वाले बिस्कुट। 

वो मस्ती, वो बदमाशी , 

वो एक दूसरे को उतना ही तंग करना ,

पर समय आने पर बिन बताये ही जान देना ,

वो लेक्चर्स के बाद की थकावट भगाने वाली चाय ,

वो लेक्चर बंक करने पर भी पी जाने वाली चाय ,

वो लाइब्रेरी में पढाई के बीच ली जाने वाली चाय ,

वो एग्जाम के बाद की सुकुन भरी चाय ,

वो अच्छे मार्क्स मिलने पर ली जाने वाली चाय ,

वो बुरे वक्त में दोस्तों का हौसला बढ़ाने वाली चाय। 

आज भी वो कैंटीन वैसी की वैसी है ,

और वो चाय भी वैसी ही बनती है ,

पर पता नहीं, जो स्वाद उन दिनों  में इसमे हुआ करता था ,

आज मानो गायब  हुआ सा लगता है। 

वैसे यहाँ कुछ बदला नही है ,

पर जो बदले है वो दिन है, हम है और हमारी उम्र शायद। 

क्योंकि आज भी वहाँ कोई खुल के हँस रहा था ,

जहाँ एक वक्त हम भी खुलकर हँसा करते थे। 

क्योंकि वहाँ आज भी कोई खुलकर जी रहा था ,

जहाँ एक वक्त हम भी खुलकर जिया करते थे ... 

जिंदगी की राह ...

पता नही कहाँ जा रहे है,

बस हम तो यूँ ही जिंदगी मे आगे चलते  जा रहे है। 

पता नही की, मंजिल और कहाँ है,

या जहाँ हम है वही मंज़िल है। 

माना के देख नही सकते के आगे क्या होगा,

पर यह भी तो तय नही कर पा रहे है,

के कब तक चलते जाना है।  

शायद इसी को जिंदगी कहते है,

जिसमे कोई एक ठिकाना ना हो,

मुकाम तो एक है कही  ,

पर मानो रास्ते बहुत हो। 

और इन रास्तों के बीच जिंदगी हमे ले जा रही है,

अपना तजुर्बा मानो खुद देती जा रही है। 

बड़ा ही दिलचस्प तरीका है जिंदगी का,

खुद के बारे मे सिखाने का। 

बड़ा ही अजीब सलीका है जिंदगी का,

खुद को दिखाने का। 

पर कुछ भी कहिये,

जितना जिंदगी सिखाती है,

किसी भी दक्षिणा की अपेक्षा न रखते हुए,

यकिन मानिये,

कोई क्या ही सिखा पाएगा। 

जितना सच्चा अनुभव यह देती है,

चाहे कैसा भी क्यों ना हो,

कोई क्या ही दे पायेगा। 


रात ...

 आज फिर से रात आ गई,

हमको हमारी औकात बता गई ... 

ए जिंदगी ...

दिल को मेरे अच्छी तरह से समझा दिया मैंने ,

ए जिंदगी, तुझको आज फिर किस्मत पर छोड दिया मैंने ...



अजिंठा . . .

  अजिंठा . . .  अजिंठा, तसाच हतबल, अबोल, तितकाच कठोर दिसणारा पण मनाने तितकाच मृदु, तितकाच देखणा, तितकाच अनुभवी, तितकाच पूर्ण व तितकाच अतृप्त...