खिड़की ...

बस मे खिड़की के पास बैठना मुझे बहुत अच्छा लगता है ,

जैसे मानो दो दुनिया को बाँधनेवाले एक माध्यम का काम ये खिड़की करती हो ,

के एक दुनिया जो बाहर की है जिससे हम जुड़ना चाहते हो भी और नही भी ,

फिर इसे हम देख सकते है , महसूस कर सकते है , जी सकते है ,

और उतना ही दूर भी रह सकते है ,

के मानो दोनों दुनियाँ में कोई रिश्ता सा हो ,

या फिर कोई पहचान भी हो नही ,

के मानो किसी की राह हम देख आगे जा रहे हो ,

या फिर किसी को सदा के लिए अलविदा कह रहे हो ,

के मानो बाहरी दुनिया में हम बसे हो ,

के मानो तो हम उनका हिस्सा हो ही नही ,

के मानो हम कही रुकना चाहते हो ,

के मानो हमे कही  रुकना हो ही नही ,

के मानो भीड़ में से कोई हमे आवाज दे  रहा हो ,

के मानो यहाँ कोई हमे जाननेवाला हो ही नही ,

के अजीब कश्मकश रहती है सब देख दिल मे ,

के हम इनमें से एक हो या फिर हम इनका हिस्सा हो ही नही। 




अकेले ...

कुछ चीजों के पीछे दौड़ते दौड़ते ,
कुछ चीजों में पीछे रह गए ,
और फिर होना क्या था ,
हम आखिर में बस अकेले रह गए।  

समय ...

 क्यों की असल जिंदगी में टाइम मशीन नहीं होती ,

इसलिए समय की बेहद अहमियत है साहब ... 


Meanings in between the lines ...

Plain are our lives like diaries that are new,

but yet there are meanings as if the meanings in between the lines ...

नया मोड़ ...

 जिंदगी एक मंच हो ,

 हर एक शख्स मानो कोई क़िरदार हो ,

समय मानो कोई ऐसी शक्ति हो ,

जो हर वक्त कोई नया मोड़ लाता  रहता है।  

मजाक ...

 कभी हसने लायक मजाक भी किया कर ए जिंदगी ,
के अब आँसू नहीं है और हमारे पास भी | 

खुशनसीब ...

अपनी ख़ुशी की आहुति ख़ुशी ख़ुशी दे दी हमने ,

और लोग कहते है के हम खुशनसीब  है | 

माँ ...

 माँ का कोई एक दिन नहीं होता, 

बल्की हर दिन माँ की वजह से होता है...

अजिंठा . . .

  अजिंठा . . .  अजिंठा, तसाच हतबल, अबोल, तितकाच कठोर दिसणारा पण मनाने तितकाच मृदु, तितकाच देखणा, तितकाच अनुभवी, तितकाच पूर्ण व तितकाच अतृप्त...