कोरोना की कृपा। ...
और भाई,
क्या चल रहा है आजकल?
भाई क्या कहे,
कोरोना ने तो जिंदगी में चार चाँद लगा दिये।
मदमस्त जानवरों को कुछ न करते पिंजरे में बैठे देख जलता था,
बस ये तो कोरोना की कृपा है,
के ये अरमान पूरा हो ही गया।
सारा दिन काम, काम और काम,
आदमी होने का मुझे मनो अफ़सोस होता था,
पर आज,
इस बेमुद्दत आराम से प्यार ही हो गया मुझे।
देखो तो किसी चीज का डर नहीं है मुझे,
क्या रोजगार, क्या पैसा,
जो होगा देखा जाएगा,
आखिर कोरोना ने आराम दिला ही दिया।
सोचता था, चक्के जैसी जिंदगी हो गयी हो जैसे मेरी,
पर आज कोरोना की कृपा की वजह से ही थम गई ये बेलगाम जिंदगी।
अपने दौड़ने की आदत का,
गुरुर था वक्त को बहोत,
पर आज उसके पहिये ,
कोरोना के हाथ में है।
अच्छा ही हुआ,
बहोत सताया है इस वक्त ने मुझे।
और सबसे अच्छी बात तो भाई,
ये लोग जो मेरे साथ रहते थे कभी,
अच्छा ही हुआ,
के छुटकारा मिला मुझे सबसे।
और क्या कहे भाई,
के जो है, सब बढ़िया है ,
और हाँ,
यह सब कोरोना की कृपा है।
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